Friday, April 7, 2023

DST NCC


 

Fateh 2023






 

 हमेशा देर कर देता हूँ मैं हर काम करने में

ज़रूरी बात कहनी हो कोई वा'दा निभाना हो

उसे आवाज़ देनी हो उसे वापस बुलाना हो

हमेशा देर कर देता हूँ मैं

मदद करनी हो उस की यार की ढारस बंधाना हो

बहुत देरीना रस्तों पर किसी से मिलने जाना हो

हमेशा देर कर देता हूँ मैं

बदलते मौसमों की सैर में दिल को लगाना हो

किसी को याद रखना हो किसी को भूल जाना हो

हमेशा देर कर देता हूँ मैं

किसी को मौत से पहले किसी ग़म से बचाना हो

हक़ीक़त और थी कुछ उस को जा के ये बताना हो

हमेशा देर कर देता हूँ मैं हर काम करने में.....



Ghazal

 मैं ढूँडता हूँ जिसे वो जहाँ नहीं मिलता

नई ज़मीन नया आसमाँ नहीं मिलता


नई ज़मीन नया आसमाँ भी मिल जाए

नए बशर का कहीं कुछ निशाँ नहीं मिलता


वो तेग़ मिल गई जिस से हुआ है क़त्ल मिरा

किसी के हाथ का उस पर निशाँ नहीं मिलता


वो मेरा गाँव है वो मेरे गाँव के चूल्हे

कि जिन में शोले तो शोले धुआँ नहीं मिलता


जो इक ख़ुदा नहीं मिलता तो इतना मातम क्यूँ

यहाँ तो कोई मिरा हम-ज़बाँ नहीं मिलता


खड़ा हूँ कब से मैं चेहरों के एक जंगल में

तुम्हारे चेहरे का कुछ भी यहाँ नहीं मिलता


Saturday, March 27, 2010

ज़िन्दगी से बड़ी सज़ा ही नहीं / कृष्ण बिहारी 'नूर'


ज़िन्दगी से बड़ी सज़ा ही नहीं,
और क्या जुर्म है पता ही नहीं
इतने हिस्सों में बट गया हूँ मैं,
मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नहीं
सच घटे या बड़े तो सच न रहे,
झूठ की कोई इन्तहा ही नहीं
जड़ दो चांदी में चाहे सोने में,
आईना झूठ बोलता ही नहीं