ਆਦਮੀ ਨੂੰ ਇਹ
ਅਹਿਸਾਸ ਕਰਾਉਣ ਲਈ
ਕਿ ਹੁਣ ਤੱਕ ਉਹ
ਜ਼ਿੰਦਾ ਸੀ............
ਮੌਤ ਆਉਂਦੀ ਹੈ।
Saturday, February 27, 2010
ਮਿਲਾਪ/ਗੁਰਿੰਦਰ ਗਿੰਦਾ
ਤੂੰ ਭਾਵੇ ਚਲਾ ਗਿਆ
ਮੇਰੇ ਮੰਨ ਦੀ ਧਰਤ ਤੇ
ਆਪਣੀ ਸ਼ਖ਼ਸੀਅਤ ਦਾ
ਮੀਂਹ ਵਰਸਾ
ਪਰ ਅੱਜ ਵੀ
ਮੇਰੇ ਮੰਨ ਦੀ
ਧਰਤ 'ਚੋਂ
ਉਠ ਰਹੀ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਮਹਿਕ
ਗਵਾਹ ਹੈ ਕਿ ਅਸੀਂ
ਮਿਲੇ ਸੀ ਕਦੇ
ਸਮੁੰਦਰ 'ਚ ਮਿਲਦੀ
ਨਦੀ ਵਾਂਗ।
ਮੇਰੇ ਮੰਨ ਦੀ ਧਰਤ ਤੇ
ਆਪਣੀ ਸ਼ਖ਼ਸੀਅਤ ਦਾ
ਮੀਂਹ ਵਰਸਾ
ਪਰ ਅੱਜ ਵੀ
ਮੇਰੇ ਮੰਨ ਦੀ
ਧਰਤ 'ਚੋਂ
ਉਠ ਰਹੀ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਮਹਿਕ
ਗਵਾਹ ਹੈ ਕਿ ਅਸੀਂ
ਮਿਲੇ ਸੀ ਕਦੇ
ਸਮੁੰਦਰ 'ਚ ਮਿਲਦੀ
ਨਦੀ ਵਾਂਗ।
Thursday, February 25, 2010
ਗਜ਼ਲ/GURINDER GINDA
ਦੋਸਤੋ ਇਸ਼ਕ ਦੇ ਰਾਹ ਔਖੇ,
ਚਲਨਾਂ ਇਹਨਾਂ ਤੇ ਹੁੰਦਾ ਆਸਾਨ ਨਹੀਂ
ਜਿਹੜੇ ਇਸ਼ਕ ਦੇ ਰਾਹ ਤੇ ਤੁਰ ਪੈਂਦੇ,
ਹੁੰਦਾ ਰੱਬ ਵੀ ਉਨ੍ਹਾਂ ਤੇ ਮਿਹਰਵਾਨ ਨਹੀਂ
ਇਸ਼ਕ ਦੇ ਇਸੇ ਰਾਹ ਉਤੇ,
ਘੜ੍ਹਾ ਸੋਹਣੀ ਨਾਲ ਵੈਰ ਕਮਾ ਬੈਠਾ
ਮਿਰਜ਼ਾ ਚੱਲ ਕੇ ਇਸੇ ਰਾਹ ਉਤੇ,
ਧੋਖਾ ਯਾਰ ਦੇ ਹਥੋਂ ਖਾ ਬੈਠਾ
ਰਾਂਝਾ ਚੱਲ ਕੇ ਇਹਨਾਂ ਪੈਂਡਿਆਂ ਤੇ,
ਹੀਰ ਤੋਂ ਪਹਿਲੋਂ ਹੀ ਮੌਤ ਵਿਆਹ ਬੈਠਾ
ਉਸ ਰਾਹ ਤੇ ਚਲਣੋਂ ਮਨ ਹੋੜ 'ਗਿੰਦੇ'
ਜਿਥੇ ਪੈਂਡਾ ਹੀ ਪਾਂਧੀ ਨੂੰ ਖਾ ਬੈਠਾ
ਗੁਰਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
ਚਲਨਾਂ ਇਹਨਾਂ ਤੇ ਹੁੰਦਾ ਆਸਾਨ ਨਹੀਂ
ਜਿਹੜੇ ਇਸ਼ਕ ਦੇ ਰਾਹ ਤੇ ਤੁਰ ਪੈਂਦੇ,
ਹੁੰਦਾ ਰੱਬ ਵੀ ਉਨ੍ਹਾਂ ਤੇ ਮਿਹਰਵਾਨ ਨਹੀਂ
ਇਸ਼ਕ ਦੇ ਇਸੇ ਰਾਹ ਉਤੇ,
ਘੜ੍ਹਾ ਸੋਹਣੀ ਨਾਲ ਵੈਰ ਕਮਾ ਬੈਠਾ
ਮਿਰਜ਼ਾ ਚੱਲ ਕੇ ਇਸੇ ਰਾਹ ਉਤੇ,
ਧੋਖਾ ਯਾਰ ਦੇ ਹਥੋਂ ਖਾ ਬੈਠਾ
ਰਾਂਝਾ ਚੱਲ ਕੇ ਇਹਨਾਂ ਪੈਂਡਿਆਂ ਤੇ,
ਹੀਰ ਤੋਂ ਪਹਿਲੋਂ ਹੀ ਮੌਤ ਵਿਆਹ ਬੈਠਾ
ਉਸ ਰਾਹ ਤੇ ਚਲਣੋਂ ਮਨ ਹੋੜ 'ਗਿੰਦੇ'
ਜਿਥੇ ਪੈਂਡਾ ਹੀ ਪਾਂਧੀ ਨੂੰ ਖਾ ਬੈਠਾ
ਗੁਰਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Friday, February 19, 2010
लहरें / ज्यून तकामी
तूफ़ान आया है
भयानक तूफ़ान
मैं खिड़की से झाँकता हूँ--
ढलान पर खड़ा पेड़
तेज़ लहरों की तरह लहरा रहा है
पेड़ की पत्तियाँ लहरें हैं हमारी इस धरती की
वैसे ही जैसे
लहरें पत्तियाँ हैं समुद्र की
ओ समुद्र की पत्तियों !
तुम्हें याद करता हूँ मैं
जैसे पेड़ पत्तियों को जीवन देता है
वैसे ही समुद्र लहरों को पालता है
तूफ़ान मेरी खिड़की पर थपेड़े मार रहा है
समुद्र है तो तूफ़ान आएगा ही
जीवन है तो तूफ़ान छाएगा ही
ओ हवा के थपेड़ों से लड़ती पत्तियों !
ओ सागर से हमेशा झगड़ती लहरों !
मानव-जीवन भी तुम्हारी तरह है
थपेड़े खाता रात-दिन
रह नहीं पाता उनके बिन
भयानक तूफ़ान
मैं खिड़की से झाँकता हूँ--
ढलान पर खड़ा पेड़
तेज़ लहरों की तरह लहरा रहा है
पेड़ की पत्तियाँ लहरें हैं हमारी इस धरती की
वैसे ही जैसे
लहरें पत्तियाँ हैं समुद्र की
ओ समुद्र की पत्तियों !
तुम्हें याद करता हूँ मैं
जैसे पेड़ पत्तियों को जीवन देता है
वैसे ही समुद्र लहरों को पालता है
तूफ़ान मेरी खिड़की पर थपेड़े मार रहा है
समुद्र है तो तूफ़ान आएगा ही
जीवन है तो तूफ़ान छाएगा ही
ओ हवा के थपेड़ों से लड़ती पत्तियों !
ओ सागर से हमेशा झगड़ती लहरों !
मानव-जीवन भी तुम्हारी तरह है
थपेड़े खाता रात-दिन
रह नहीं पाता उनके बिन
मैं कमज़ोर हूँ / ज्यून तकामी
मैं कमज़ोर हूँ
मैं लड़ नहीं सकता
ख़ुद जीने के लिए मैं दूसरों को
जाल में नहीं फँसा सकता
मैं कमज़ोर हूँ
लेकिन मुझे इतना नीचे गिरने में
आती है शरम
कि कत्ल करूँ दूसरों का
ख़ुद जीने के लिए
मैं कमज़ोर हूँ
लेकिन मुझे इतना नीचे गिरने में
आती है शरम
कि दूसरों के शब्दों को कह सकूँ
अपने शब्दों की तरह
मैं कमज़ोर हूँ
हमेशा सम्भाल कर रखूंगा अपनी कमज़ोरी ।
मैं लड़ नहीं सकता
ख़ुद जीने के लिए मैं दूसरों को
जाल में नहीं फँसा सकता
मैं कमज़ोर हूँ
लेकिन मुझे इतना नीचे गिरने में
आती है शरम
कि कत्ल करूँ दूसरों का
ख़ुद जीने के लिए
मैं कमज़ोर हूँ
लेकिन मुझे इतना नीचे गिरने में
आती है शरम
कि दूसरों के शब्दों को कह सकूँ
अपने शब्दों की तरह
मैं कमज़ोर हूँ
हमेशा सम्भाल कर रखूंगा अपनी कमज़ोरी ।
Thursday, February 18, 2010
बच्चों की दुआ / इक़बाल
लब पे' आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी,
ज़िन्दगी शमा की सूरत हो ख़ुदाया मेरी ।
दूर दुनिया का मेरे दम से अंधेरा हो जाए
हर जगह मेरे चमकने से उजाला हो जाए ।
हो मेरे दम से यूँ ही वतन की ज़ीनत,
जिस तरह फूल से होती है चमन की ज़ीनत ।
ज़िन्दगी हो मेरी परवाने की सूरत या रब !
इल्म की शमा से हो मुझ को मुहब्बत या रब !
हो मेरा काम ग़रीबों की हिमायत करना,
दर्दमंदों से, ज़ईफ़ों से मुहब्बत करना ।
मेरे अल्लाह, बुराई से बचाना मुझ को,
नेक जो राह हो, उस रह पे' चलाना मुझ को ।
ज़िन्दगी शमा की सूरत हो ख़ुदाया मेरी ।
दूर दुनिया का मेरे दम से अंधेरा हो जाए
हर जगह मेरे चमकने से उजाला हो जाए ।
हो मेरे दम से यूँ ही वतन की ज़ीनत,
जिस तरह फूल से होती है चमन की ज़ीनत ।
ज़िन्दगी हो मेरी परवाने की सूरत या रब !
इल्म की शमा से हो मुझ को मुहब्बत या रब !
हो मेरा काम ग़रीबों की हिमायत करना,
दर्दमंदों से, ज़ईफ़ों से मुहब्बत करना ।
मेरे अल्लाह, बुराई से बचाना मुझ को,
नेक जो राह हो, उस रह पे' चलाना मुझ को ।
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